बीएसए कार्यालय में हंगामा करते शिक्षकPC: Break News Byuro
ब्रेक न्यूज़ ब्यूरो
(सुभाष सिंह)गोंडा बेसिक शिक्षा विभाग के बीएसए कार्यालय में शुक्रवार को शिक्षकों ने मर्यादा को तार-तार कर दिया। पदोन्नति में स्कूलों की संख्या बढ़ाए जाने को लेकर महिला शिक्षिकाओं ने बीएसए मुर्दाबाद के नारे लगाए और कार्यालय गेट पर धरना दिया। कुछ देर बाद स्थिति जब सामान्य हुई तो श्रेय लेने के फेर में दो शिक्षक आपस में भिड़ गए। इन शिक्षकों ने कहासुनी के दौरान मर्यादा की सारी सीमाओं को तोड़ते हुए शिक्षक की गरिमा को कलंकित कर दिया।
बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को पदोन्नत किया जाना है। इस प्रक्रिया को 21 अक्तूबर तक पूरा करने का निर्देश बेसिक शिक्षा सचिव ने दिया है। पदोन्नति के लिए महिला व निशक्त शिक्षकों को अपने सुविधा के अनुरूप स्कूलों का चयन कर उनके विकल्प भरने के लिए शुक्रवार को पंतनगर स्थित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बुलाया गया था।
इन 130 शिक्षकों को विकल्प देने के लिए बीएसए ने 270 प्राथमिक व 100 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की सूची चस्पा की थी। लेकिन विकल्प भरने के लिए आईं महिला शिक्षिकाओं ने स्कूलों की सूची को नाकाफी बताते हुए बीएसए से और स्कूलों के विकल्प देने के लिए कहा तो बीएसए ने शासनादेश का हवाला देते हुए और विद्यालय खोलने से इन्कार कर दिया।
बीएसए के इस अड़ियल रवैये से नाराज शिक्षिकाओं ने विकल्प भरने से मना कर दिया और बीएसए कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गईं। शिक्षिकाओं ने बीएसए मुर्दाबाद व बीएसए वापस जाओ के नारे भी लगाए। कुछ शिक्षिकाएं इसकी शिकायत लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंच गईं।
शिक्षिकाओं ने डीएम को बताया कि बीएसए सचिव के आदेश का अनुपालन नहीं करा रहे हैं। इस पर जब डीएम के हस्तक्षेप पर बीएसए स्कूलों की सूची बढ़ाने को तैयार हुए तो इसका श्रेय लेने के लिए शिक्षक संगठनों के दो शिक्षक आपस में भिड़ गए। इन शिक्षकों ने कहासुनी के दौरान सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर अपशब्दों की बौछार करते हुए शिक्षक की मर्यादा को कलंकित कर दिया। बाद में कुछ वरिष्ठ शिक्षकों के समझाने के बाद मामला शांत हो सका और शिक्षिकाओं ने स्कूलों के लिए विकल्प भरे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पिछले एक माह में दो बार अपने फैसलों को लेकर विभाग की किरकिरी करा चुके हैं। दोनों ही बार इन्हें अपने फैसलों को बदलना पड़ा। पहले अतंरजनपदीय शिक्षकों की तैनाती में स्कूलों की सूची को लेकर ही विवाद हुआ और शिक्षकों ने बीएसए से लेकर जिलाधिकारी के आवास तक का घेराव किया और अब पदोन्नति में महिला व निशक्त शिक्षकों को विकल्प देने के मामले में उनकी कार्यशैली से शुक्रवार को हुए हंगामे ने उनके निर्णय लेने की क्षमता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
इन 130 शिक्षकों को विकल्प देने के लिए बीएसए ने 270 प्राथमिक व 100 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों की सूची चस्पा की थी। लेकिन विकल्प भरने के लिए आईं महिला शिक्षिकाओं ने स्कूलों की सूची को नाकाफी बताते हुए बीएसए से और स्कूलों के विकल्प देने के लिए कहा तो बीएसए ने शासनादेश का हवाला देते हुए और विद्यालय खोलने से इन्कार कर दिया।
बीएसए के इस अड़ियल रवैये से नाराज शिक्षिकाओं ने विकल्प भरने से मना कर दिया और बीएसए कार्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गईं। शिक्षिकाओं ने बीएसए मुर्दाबाद व बीएसए वापस जाओ के नारे भी लगाए। कुछ शिक्षिकाएं इसकी शिकायत लेकर जिलाधिकारी के पास पहुंच गईं।
शिक्षिकाओं ने डीएम को बताया कि बीएसए सचिव के आदेश का अनुपालन नहीं करा रहे हैं। इस पर जब डीएम के हस्तक्षेप पर बीएसए स्कूलों की सूची बढ़ाने को तैयार हुए तो इसका श्रेय लेने के लिए शिक्षक संगठनों के दो शिक्षक आपस में भिड़ गए। इन शिक्षकों ने कहासुनी के दौरान सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर अपशब्दों की बौछार करते हुए शिक्षक की मर्यादा को कलंकित कर दिया। बाद में कुछ वरिष्ठ शिक्षकों के समझाने के बाद मामला शांत हो सका और शिक्षिकाओं ने स्कूलों के लिए विकल्प भरे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पिछले एक माह में दो बार अपने फैसलों को लेकर विभाग की किरकिरी करा चुके हैं। दोनों ही बार इन्हें अपने फैसलों को बदलना पड़ा। पहले अतंरजनपदीय शिक्षकों की तैनाती में स्कूलों की सूची को लेकर ही विवाद हुआ और शिक्षकों ने बीएसए से लेकर जिलाधिकारी के आवास तक का घेराव किया और अब पदोन्नति में महिला व निशक्त शिक्षकों को विकल्प देने के मामले में उनकी कार्यशैली से शुक्रवार को हुए हंगामे ने उनके निर्णय लेने की क्षमता पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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