Thursday, July 14, 2016

लखनऊ : उत्तरप्रदेश में शीला दीक्षित के क्या है मायने

ब्रेक न्यूज़ ब्यूरो 
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़ा वोट को लेकर  वोट में सपा, बसपा और भाजपा में मची भागदौड़ के बीच कांग्रेस राज्य में मुस्लिम, ब्राह्मण और ठाकुर वोट को गोलबंद करने की सियासत कर रही है। शीला दीक्षित को बतौर मुख्य मंत्री प्रॉजेक्ट करने को कांग्रेस की ब्राह्मण वोट को गोलबंद करने की रणनीति का हिस्सा मन जा रहा है यूपी में 10 से 12 फीसदी ब्राहमण हैं। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 12 फीसदी वोट मिला था।फिलहाल यूपी में ज्यादातर ब्राह्मण बीजेपी और बीएसपी को अपना वोट देते हैं। कांग्रेस नेताओं का ये भी मानना रहा है कि शीला दीक्षित ने बतौर सीएम दिल्ली में बहुत ही अच्छा काम किया है और उनके इस छवि के सहारे यूपी को जीता जा सकता है। इस से पहले कांग्रेस ने गुलाम नबी आजाद को प्रदेश का प्रभारी बनाया। मुस्लिम मतदाताओं में उनके प्रति पूरा सद्भाव है। फिर राज बब्बर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।   और सपा  परिवार की लंबी राजनीति के कारण उनकी भी मुसलमानों में अच्छी पकड़ है।
एक अन्य  चेहरा प्रदेश के ठाकुर नेता और अमेठी के राजा संजय सिंह का है। बताया जा रहा है कि उनको चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाया जा सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा भी उत्तर प्रदेश के चुनाव में प्रचार करेंगी। वे अमेठी और रायबरेली से बाहर दूसरे इलाकों में भी प्रचार करेंगी और कहा जा रहा है कि चुनाव की घोषणा से पहले ही उनकी रैलियां शुरू हो जाएंगी। इस तरह यूपी की बेटी प्रियंका और बहू शीला दीक्षित की परफेक्ट जोड़ी बन सकती है।

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