यूपी में पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिले सरकारी आवास पर जीवनभर नहीं रह सकते. दो महीने के भीतर घर खाली करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने यूपी पूर्व मुख्यमंत्री आवास नियमावली 1997 को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा की ये नियमावली संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है.
लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्रियों को भारी भरकम आवास आवंटित करने के सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. साल 2004 में लोकप्रहरी नाम की एक संस्था ने जनहित याचिका डालकर पूर्व मुख्यमंत्रियों और एनजीओ/संस्थाओं को करोड़ों रुपये कीमत के आवास आवंटित करने के सरकारी निर्णय को चुनौती दी थी.
साल 2014 में पूरी हुई थी सुनवाई
साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और आदेश सुरक्षित रख लिया था. अब सुप्रीम कोर्ट 2016 में अपना फैसला सुनाया है. जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास मिले हैं उनमें राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, एनडी तिवारी, मुलायम सिंह यादव, मायावती, राम नरेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं.
साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी की और आदेश सुरक्षित रख लिया था. अब सुप्रीम कोर्ट 2016 में अपना फैसला सुनाया है. जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास मिले हैं उनमें राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, एनडी तिवारी, मुलायम सिंह यादव, मायावती, राम नरेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री शामिल हैं.
याचिका के मुताबिक इनमें से बहुत के पास दूसरे सरकारी बंगलें हैं फिर भी लखनऊ में इन्हें बंगला दिया गया है जिसमें इनके परिवार के लोग रहते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद यूपी सहित कई राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपना सरकारी बंगला छोड़ना होगा। अपना बंदोबस्त कहीं और करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ 2 महीने का समय दिया है।
यूपी के मुख्यमंत्री रहे एनडी तिवारी, राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह, मायावती, कल्याण सिंह और रामनरेश यादव को बंगले मिले हुए थे। अब उनको आजीवन मिले बंगले खाली करने होंगे। यह सभी बंगले लखनऊ में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा कि ‘सरकारी बंग्ला जीवनभर के लिए नहीं होता।’

इसके अलावा उत्तराखंड के भी 4 पूर्व मुख्यमंत्री इस फैसले के चपेट में आयेंगे . भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चन्द खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा को भी बंगले खाली करने होंगे.
दरअसल, यूपी में एक सरकारी आदेश जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले दिए जायेंगे। 2004 में लोक प्रहरी नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि यह आदेश रद्द किये जाएं और अगर इसे जारी रखा गया तो बाकि राज्यों पर भी इसका असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था और अब अपना आदेश सुनाया है।
No comments:
Post a Comment